: जीवन आनंद फाउंडेशन को मिला 25 अप्रैल से 1 मई की कथा तारीख…. इस्पात नगरी भिलाई में दूसरी बार पंडित मिश्रा का आगमन
Sat, Mar 11, 2023
भिलाई नगर 11मार्च 2023 : अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक सिहोर वाले पं. प्रदीप मिश्रा की शिवमहापुराण कथा की तैयारी इस्पात नगरी भिलाई में शुरू हो गई है। जीवन आनंद फाउंडेशन द्वारा इस शिवमहापुराण की कथा का आयोजन किया जाना है। कथा आयोजित करने के लिए फांउडेशन के विनोद सिंह ने आचार्य पं. मिश्रा से मुलाकात की गई है। इस दौरान भिलाई में कथा के लिए 25 अप्रैल से 1 मई तक की तिथि तय की गई है। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी दूसरी दफा इस्पात नगरी भिलाई आगमन हो रहा है इसके पूर्व बीएसपी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेक्टर 7 के परिसर में उनका आगमन हुआ था राजधानी रायपुर में भी उनका पूर्व में आगमन हो चुका है। इस्पात नगरी भिलाई में कथा को लेकर अभी स्थल का चयन नहीं हुआ है शीघ्र ही स्थल का भी चयन कर लिया जाएगाअंतर्राष्ट्रीय कथावाचक सिहोर वाले प्रदीप मिश्रा की शिवमहापुराण कथा श्रवण करने के लिए लाखों भक्तों की भीड़ जुटती है। हजारों भक्तजन पंडाल में ही सात दिन तक रुकते हैं और कथा श्रवण करते हैं। पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह की जरूरत पड़ती है। इस हिसाब से मिलाई में शिवमहापुराण की कथा स्थल के लिए जीवन आनंद फाउंडेशन द्वारा प्रशासन से बातचीत चल रही है।अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक सिहोर वाले प प्रदीप मिश्रा को शिवमहापुराण कथा में न केवल स्थानीय बल्कि आसपास जिले के लोग पहुंचते हैं। कथा स्थल का विशेष महत्व शिवमहापुराण कथा में बताया गया है। इसलिए जितने दिन की कथा होती है उतने दिन स्थल कैलाशधान के रूप में कथा स्थल पूजा जाता है। जिसकी वजह से भक्तजन इस पावन धरा की रज को प्रणाम करने के लिए लाखों की संख्या में पहुंचते हैं।अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक सिहोर वाले पं. मिश्रा की शिवमहापुराण कथा बीएसपी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय प्रांगण सेक्टर 7 के मैदान में दिसंबर 2021 को आयोजित की गई थी। मां कामाक्षा महिला मंडल द्वारा यह कथा पहली बार आयोजित की गई थी। तब भिलाई, दुर्ग व आसपास के लोगों के बीच भगवान शिव की महिमा इतनी अधिक नहीं पहुंच पाई थी जितनी आज है।तैयारी कुबेर भंडारी की मिलाई की पावनधरा पर कुबेर भंडारी का आगमन गमन हो रहा है। अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक सिहोर वाले प. प्रदीप मिश्रा जी ने शिवमहापुराण कथा की तिथि प्रदान कर दी है। कथा स्थल चयन दो-तीन दिन के भीतर कर लिया जाएगा।अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक सिहोर वाले पं. प्रदीप मिश्रा की शिवमहापुराण कथा श्रवण करने के लिए लाखों भक्तों की भीड़ जुटती है। हजारों भक्तजन पंडाल में ही सात दिन तक रूकते हैं और कथा श्रवण करते हैं। पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह की जरूरत पड़ती है। इस हिसाब से भिलाई में शिवमहापुराण की कथा स्थल के लिए जीवन आनंद फाउंडेशन द्वारा प्रशासन से बातचीत चल रही है।विनोद सिंह आयोजक जीवन आनंद फाउंडेशन भिलाई
: राजिम पुन्नी मेला का अंचल में विशेष महत्व है छत्तीसगढ़ शासन द्वारा स्थानीय आयोजन समिति के सहयोग से होता है**
Sat, Feb 18, 2023
राजिम पुन्नी मेले का आयोजन छत्तीसगढ़ शासन एवं स्थानीय आयोजन समिति के सहयोग से होता है। मेला की शुरुआत कल्पवाश से होती है पखवाड़े भर पहले से श्रद्धालु पंचकोशी यात्रा प्रारंभ कर देते है। पंचकोशी यात्रा में श्रद्धालु पटेश्वर, फिंगेश्वर, ब्रम्हनेश्वर, कोपेश्वर तथा चम्पेश्वर नाथ के पैदल भ्रमण कर दर्शन करते हैमाघ पूर्णिमा से मेले का आरम्भ होता है, जिसमें विभिन्न स्थानों से हजारो साधू संतो का आगमन होता है, प्रतिवर्ष हजारो के संख्या में नागा साधू, संत आदि आते है। लोगो में मान्यता है की जगन्नाथपुरी की यात्रा तब तक पूरी नही मानी जाती जब तक राजीव लोचन तथा कुलेश्वर नाथ के दर्शन नहीं कर लिए जाते। कहते हैं माघ पूर्णिमा के दिन स्वयं भगवान जगन्नाथ पुरी से यहां आते हैं।उस दिन जगन्नाथ मंदिर के पट बंद रहते हैं और भक्तों को भी राजीव लोचन में ही भगवान जगन्नाथ के दर्शन होते हैं। राजिम पुन्नी मेले का अंचल में अपना एक विशेष महत्व है जिसमें विभिन्न राज्यों से लाखो की संख्या में लोग आते हैं।प्रति वर्ष होने वाले कुम्भ मेले को राजिम कुम्भ के नाम से भी जाना जाता है। अब इस कुम्भ को राजिम पुन्नी मेला महोत्सव कहा जाने लगा है। यह मेला प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक पंद्रह दिनों लगता है। मेले भारतीय ग्रामीण संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। अधिकांश मेले किसी तीर्थ स्थान अथवा शुभ अवसर से सम्बद्ध होते हैं। सामाजिक एवं धार्मिक रूप से महत्त्वपूर्ण इन मेलों का ग्रामीण अर्थव्यवस्था से गहरा सम्बन्ध होता है। छोटे गांवों में बाजार का अभाव होता है ,यहाँ के लोग इन मेलों से ही वह वस्तुएं खरीदते हैं जो उनके गांव में आम दिनों में नहीं मिलतीं। शादी ब्याह की खरीदारी तो इन मेलों से ही की जाती है। छत्तीसगढ़ के मेले यहाँ की पारम्परिक संस्कृति को बचाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।यह मुख्य रूप से तीन नदिया बहती है, जिनके नाम क्रमश महानदी, पैरी नदी तथा सोढुर नदी है, राजिम तीन नदियों का संगम स्थल है, संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव जी विराजमान है, वर्ष २००१ से राजिम मेले को राजीव लोचन महोत्सव के रूप में मनाया जाता था, २००५ से इसे कुम्भ के रूप में मनाया जाता रहा था, यह आयोजन छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग, एवम स्थानीय आयोजन समिति के सहयोग से होता है