BREAKING NEWS

का परिणाम कांग्रेस व विपक्षी दलों को भुगतना पड़ेगा - साय

मोदोल लाइब्रेरी चारामा का शुभारंभ

की करेंगे समीक्षा, राजधानी में दो दिनों तक लेंगे मैराथन बैठक

तब राज्य होता है मजबूत - मंत्री राजवाड़े

को मिलेगी मजबूती, जशपुर सहित कई क्षेत्रों को बड़ी सौगात

Advertisment

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9753200176 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9753200176 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9753200176 है।

: सुलगते सवाल: क्यों मंत्री नहीं बने ये बड़े नेता ? किसके लिए खाली है एक कुर्सी ?

सुलगते सवाल: क्यों मंत्री नहीं बने ये बड़े नेता ? किसके लिए खाली है एक कुर्सी ? किसके लिए खाली है एक कुर्सी? म्युजिकल चेयर की तरह विष्णुदेव साय कैबिनेट में मंत्री पद की एक सीट खाली रखी गई है। इस कुर्सी के इर्द-गिर्द कई चेहरों को लेकर उनके समर्थकों में उम्मीदें बंधी हैं। कोई कह रहा है कि लोकसभा में टिकट नहीं मिली, तो उनके लिए खाली रखी गई है। किसी के पास उम्र का हवाला है, किसी के पास सीनियरिटी की दलील, किसी के पास अपनी लंबी जीत की प्रोफाइल, किसी को अपने साथ जातिगत समीकरण होने का भ्रम है, तो किसी को महिला होने का। लेकिन वक्त की चाक पर इन चेहरों के बीच घूमती हुई इस कुर्सी पर कौन बैठेगा, ये तो वक्त ही बताएगा? तब तक सिर्फ कयास, इंतजार, आस और उम्मीद। क्योंकि बीजेपी में इसके अलावा और कुछ करने की गुंजाइश भी नहीं। बीजेपी के पितृ पुरुष कहे जाने वाले दिवंगत नेता लखीराम अग्रवाल के बेटे अमर अग्रवाल 1998, 2003, 2008 और 2013 में विधायक चुने गए। 2018 में हार के बाद इस बार शैलेष पांडेय को हराकर फिर बिलासपुर से चुनाव जीते। लेकिन रमन सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहने के दौरान आंख फोड़वा कांड, गर्भाशय कांड जैसे मामले ने उनके साथ सरकार की छवि भी खराब की थी। नगरीय प्रशासन मंत्री रहते हुए बिलासपुर को धूलपुर बनाने और सीवरेज परियोजना से आम जनता के गुस्से का शिकार हुए। रमन सरकार के सबसे भरोसेमंद और तगड़े मैनेजमैंट के लिए विख्यात राजेश मूणत 2003, 2008 और 2013 में विधायक बने। लगातार 15 साल मंत्री रहे। लेकिन 2018 के चुनाव में विकास उपाध्याय से हारने के बाद उनका कद छोटा होता गया। इस बार जीत के बाद भी साय कैबिनेट में जगह नहीं मिली। 1996, 1998, 1999 और 2004 में लोकसभा सांसद रहे पुन्नूलाल मोहले रमन सरकार में एससी वर्ग का चेहरा थे। 3 बार के मंत्री 4 बार सांसद मोहले 7 वीं बार विधायक चुने गए। लेकिन विष्णुदेव साय कैबिनेट में जगह नहीं मिली। पार्टी ने उनकी जगह दयालदास बघेल को मौका दिया। तेज-तर्रार छवि वाले और ओबीसी चेहरे अजय चंद्राकर 1998, 2003, 2013, 2018 और 2023 में 5 वीं बार विधायक बने। 2003 और 2013 में रमन सरकार में मंत्री रहे अजय चंद्राकर को ओबीसी चेहरा होने का फायदा नहीं मिला। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहने के साथ पांच बार के विधायक और एक बार के सांसद विक्रम उसेंडी को भी जीत के बाद पार्टी ने कैबिनेट में जगह नहीं दी। बस्तर से बीजेपी का आदिवासी महिला चेहरा रहीं लता उसेंडी और सरगुजा के सूरजपुर से जीते भैयालाल राजवाड़े को भी कैबिनेट में जगह नहीं मिली। उनकी जगह पार्टी ने राजवाड़े समाज से नए चेहरे लक्ष्मी राजवाड़े को मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया। विधानसभा अध्यक्ष के अलावा प्रदेश अध्यक्ष रह चुके धरमलाल कौशिक को पार्टी का अनुभवी ओबीसी चेहरा होने के बावजूद दरकिनार किया गया। 1998, 2008, 2018 और 2023 में विधायक बने धरमलाल कौशिक को बिलासपुर से अरुण साव के डिप्टी सीएम बन जाने की वजह से मौका नहीं मिला। इसी तरह मोदी कैबिनेट में केंद्रीय राज्य मंत्री रहीं रेणुका सिंह को भी मंत्री पद नहीं मिला, जबकि वे पहले प्रदेश में मंत्री रह चुकी हैं। इसी तरह सांसद गोमती साय को भी मंत्री नहीं बनाया गया। Cglive24 news

विज्ञापन

जरूरी खबरें