: : भूपेश बघेल का सबसे बड़ा फैसला पलटने जा रही है विष्णुदेव साय सरकार! डेप्युटी सीएम ने दिया इशारा
Admin Mon, Jul 22, 2024
भूपेश बघेल का सबसे बड़ा फैसला पलटने जा रही है विष्णुदेव साय सरकार! डेप्युटी सीएम ने दिया इशारा
Cglive24 news
छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव से पहले सरकार बड़ी तैयारी में है। मेयर और अध्यक्ष का चुनाव एक बार फिर से प्रत्यक्ष प्रणाली से हो सकता है। सरकार ने इसके लिए तैयारियों शुरू कर दी हैं। भूपेश बघेल ने मेयर का चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से कराने का फैसला किया था।
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रायपुर: छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार, भूपेश बघेल सरकार का एक बड़ा फैसला बदलने की तैयारी कर रही है। इस बात के संकेत राज्य के डेप्युटी सीएम अरुण साव ने भी दिये हैं। दरअसल, राज्य में दिसंबर में नगरीय निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं। सरकार नगरीय निकाय चुनाव से पहले उसके स्वरूप में बड़ा बदलाव कर सकती है। निकाय चुनाव में महापौर और अध्यक्षों का चुनाव अब प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने की तैयारी हो रही है। सूत्रों का कहना है कि सरकार ने इसके लिए ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और 22 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में इस विधेयक को पेश किया जा सकता है।
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सूत्रों के अनुसार, सरकार के निर्देश पर इस संबंध में विधि विभाग डॉफ्ट तैयार कर रहा है। माना जा रहा है कि मानसून सत्र में इस संबंध में संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि इस प्रस्ताव को कैबिनेट में पास कराने के बाद अगले सत्र में सदन में पेश किया जा सकता है। बीजेपी शुरू से अध्यक्ष और महापौर के प्रत्यक्ष चुनाव की पक्षधर रही है।
मतदान से होगा महापौर का चुनाव
प्रत्यक्ष चुनाव होने का फायदा यह है कि जनता अपनी पसंद के उम्मीदवार को महापौर चुन सकती है। महापौर बनाने के लिए किसी भी पार्टी या फिर निर्दलीय पार्षदों की तोड़-फोड़ नहीं की जाती है। ऐसे में बीजेपी इस प्रस्ताव पर तैयारी कर रही है।
भूपेश बघेल ने बदला था फैसला
छत्तीसगढ़ में पहले प्रत्यक्ष तौर पर ही महापौर और अध्यक्षों का चुनाव होता था। 2018 में राज्य में कांग्रेस सरकार बनी थी। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस फैसले को पलट दिया था। उन्होंने मेयर और अध्यक्ष के चुनाव को प्रत्यक्ष से बदलकर अप्रत्यक्ष प्रणाली से कर दिया था। जिसके बाद मतदाताओं के पास महापौर और अध्यक्ष चुनने का अधिकार नहीं था। वह केवल पार्षद चुन सकते थे। चुने गए पार्षद मेयर और अध्यक्षों का चुनाव करते थे। भूपेश बघेल के इस फैसले को उस समय सबसे बड़ा राजनीतिक फैसला कहा गया था।
डेप्युटी सीएम ने कहा जल्द होगा फैसला
मेयर का चुनाव मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, गुजरात, आंधप्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों नें मेयर का चुनाव प्रत्यक्ष तौर पर होता है। इस मामले में राज्य के डेप्युटी सीएम अरुण साव ने कहा इस मामले में विचार चल रहा है। विधि विभाग से राय मांगी गई है इस पर जल्द ही फैसला होगा।

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छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव से पहले सरकार बड़ी तैयारी में है। मेयर और अध्यक्ष का चुनाव एक बार फिर से प्रत्यक्ष प्रणाली से हो सकता है। सरकार ने इसके लिए तैयारियों शुरू कर दी हैं। भूपेश बघेल ने मेयर का चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से कराने का फैसला किया था।
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रायपुर: छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार, भूपेश बघेल सरकार का एक बड़ा फैसला बदलने की तैयारी कर रही है। इस बात के संकेत राज्य के डेप्युटी सीएम अरुण साव ने भी दिये हैं। दरअसल, राज्य में दिसंबर में नगरीय निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं। सरकार नगरीय निकाय चुनाव से पहले उसके स्वरूप में बड़ा बदलाव कर सकती है। निकाय चुनाव में महापौर और अध्यक्षों का चुनाव अब प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने की तैयारी हो रही है। सूत्रों का कहना है कि सरकार ने इसके लिए ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और 22 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में इस विधेयक को पेश किया जा सकता है।
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सूत्रों के अनुसार, सरकार के निर्देश पर इस संबंध में विधि विभाग डॉफ्ट तैयार कर रहा है। माना जा रहा है कि मानसून सत्र में इस संबंध में संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि इस प्रस्ताव को कैबिनेट में पास कराने के बाद अगले सत्र में सदन में पेश किया जा सकता है। बीजेपी शुरू से अध्यक्ष और महापौर के प्रत्यक्ष चुनाव की पक्षधर रही है।
मतदान से होगा महापौर का चुनाव
प्रत्यक्ष चुनाव होने का फायदा यह है कि जनता अपनी पसंद के उम्मीदवार को महापौर चुन सकती है। महापौर बनाने के लिए किसी भी पार्टी या फिर निर्दलीय पार्षदों की तोड़-फोड़ नहीं की जाती है। ऐसे में बीजेपी इस प्रस्ताव पर तैयारी कर रही है।
भूपेश बघेल ने बदला था फैसला
छत्तीसगढ़ में पहले प्रत्यक्ष तौर पर ही महापौर और अध्यक्षों का चुनाव होता था। 2018 में राज्य में कांग्रेस सरकार बनी थी। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस फैसले को पलट दिया था। उन्होंने मेयर और अध्यक्ष के चुनाव को प्रत्यक्ष से बदलकर अप्रत्यक्ष प्रणाली से कर दिया था। जिसके बाद मतदाताओं के पास महापौर और अध्यक्ष चुनने का अधिकार नहीं था। वह केवल पार्षद चुन सकते थे। चुने गए पार्षद मेयर और अध्यक्षों का चुनाव करते थे। भूपेश बघेल के इस फैसले को उस समय सबसे बड़ा राजनीतिक फैसला कहा गया था।
डेप्युटी सीएम ने कहा जल्द होगा फैसला
मेयर का चुनाव मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, गुजरात, आंधप्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों नें मेयर का चुनाव प्रत्यक्ष तौर पर होता है। इस मामले में राज्य के डेप्युटी सीएम अरुण साव ने कहा इस मामले में विचार चल रहा है। विधि विभाग से राय मांगी गई है इस पर जल्द ही फैसला होगा।

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