: युक्तियुक्तकरण को लेकर डीपीआई और शिक्षक संगठनों की बैठक खत्म, शिक्षकों से मांगे गए सुझाव
Admin Thu, Aug 29, 2024
युक्तियुक्तकरण को लेकर डीपीआई और शिक्षक संगठनों की बैठक खत्म, शिक्षकों से मांगे गए सुझाव
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युक्तियुक्तकरण को लेकर डीपीआई और शिक्षक संगठनों की बैठक खत्म हो गई है। बैठक में 11 संगठनों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन डीपीआई दिव्या मिश्रा अनुपस्थित थे। उनके स्थान पर अपर संचालक योगेश शिवहरे, उप संचालक आशुतोष चावरे और अशोक बंजारे ने भाग लिया। बैठक में उपस्थित शिक्षकों से युक्तियुक्तकरण के संबंध में आपत्तियां और सुझाव मांगे गए।
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https://youtu.be/TEv6Hx-wpCQ?si=zQnG4xM01C_0f8iv
युक्तियुक्तकरण पर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए
बैठक में शिक्षक संगठनों से पूछा गया कि युक्तियुक्तकरण के किन बिंदुओं पर उनकी आपत्तियां हैं और किन बिंदुओं पर उनके सुझाव हैं। शिक्षक संगठनों की बातों को भी सुना गया। बैठक लगभग 50 मिनट तक चली। इस दौरान विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रमुख नेता उपस्थित थे, जिनमें वीरेंद्र दुबे, केदार जैन, संजय शर्मा, विकास राजपूत, अनिल शुक्ला, कमल वर्मा, मनीष मिश्रा और ओंकार सिंह ठाकुर शामिल थे।
कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने सौंपा ज्ञापन
मंगलवार को कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मुख्य सचिव और शिक्षा सचिव को ज्ञापन सौंपा, जिसमें युक्तियुक्तकरण के विरोध में 16 सितंबर को धरना और रैली के आयोजन की जानकारी दी गई थी। इसके तुरंत बाद सरकार ने शिक्षक संगठनों को चर्चा के लिए बुलाया और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा।
युक्तियुक्तकरण के फैसले का विरोध कर रहे शिक्षक संगठन
शिक्षक संगठन युक्तियुक्तकरण के फैसले का विरोध कर रहे हैं, जिसमें प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं को एक साथ मर्ज किया जाना है। उनकी मांग है कि 2008 के सेटअप के अनुसार शिक्षकों की संख्या को बिना किसी बदलाव के बनाए रखा जाए, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में कोई कमी न हो। उन्हें डर है कि शिक्षकों की संख्या में कटौती से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
अगर सरकार शिक्षक संगठनों की मांगों को पूरा नहीं करती है, तो शिक्षक संगठन 16 सितंबर को आयोजित धरना और रैली के बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन की शुरुआत कर सकते हैं। शिक्षक संगठनों ने सरकार को ज्ञापन सौंपा, जिसके तुरंत बाद सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बैठक का समय तय किया और शिक्षक संगठनों को चर्चा के लिए बुलाया।
शिक्षकों की संख्या में कोई कटौती न की जाए: दुबे
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रदेश संचालक वीरेंद्र दुबे ने बताया कि युक्तियुक्तकरण के खिलाफ प्रदेश के विभिन्न जिलों के कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, शिक्षा सचिव व संचालक महोदय को ज्ञापन सौंपा गया है
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो 9 सितंबर को प्रदेश के सभी स्कूलों में तालाबंदी की जाएगी। इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा का भी समर्थन मिला है। शिक्षक संगठनों की मांग है कि युक्तियुक्तकरण के फैसले को वापस लिया जाए और शिक्षकों की संख्या में कोई कटौती न की जाए।
क्या होता है युक्तियुक्तकरण?
युक्तियुक्तकरण एक शैक्षिक प्रबंधन प्रक्रिया है जिसमें विद्यालयों के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव किया जाता है, ताकि शैक्षिक प्रक्रिया को अधिक कुशल और प्रभावी बनाया जा सके। इसके तहत विद्यालयों के आकार, संरचना और प्रबंधन में बदलाव किया जा सकता है, जैसे कि छोटे विद्यालयों को बड़े विद्यालयों में मर्ज करना या विद्यालयों के बीच संसाधनों का समायोजन करना।
यह प्रक्रिया अक्सर शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार, संसाधनों का बेहतर उपयोग, और शिक्षकों की क्षमता निर्माण पर केंद्रित होती है। हालांकि, युक्तियुक्तकरण के फैसले अक्सर विवादित होते हैं, क्योंकि वे शिक्षकों की नौकरियों, विद्यार्थियों की पढ़ाई, और स्थानीय समुदायों पर प्रभाव डाल सकते हैं।
[caption id="attachment_6952" align="alignnone" width="300"]
Oplus_131072[/caption]
छत्तीसगढ़ के शिक्षक संगठन युक्तियुक्तकरण के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह फैसला शिक्षकों की संख्या में कटौती करेगा और शैक्षिक गुणवत्ता को प्रभावित करेगा।
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युक्तियुक्तकरण को लेकर डीपीआई और शिक्षक संगठनों की बैठक खत्म हो गई है। बैठक में 11 संगठनों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन डीपीआई दिव्या मिश्रा अनुपस्थित थे। उनके स्थान पर अपर संचालक योगेश शिवहरे, उप संचालक आशुतोष चावरे और अशोक बंजारे ने भाग लिया। बैठक में उपस्थित शिक्षकों से युक्तियुक्तकरण के संबंध में आपत्तियां और सुझाव मांगे गए।
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युक्तियुक्तकरण पर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए
बैठक में शिक्षक संगठनों से पूछा गया कि युक्तियुक्तकरण के किन बिंदुओं पर उनकी आपत्तियां हैं और किन बिंदुओं पर उनके सुझाव हैं। शिक्षक संगठनों की बातों को भी सुना गया। बैठक लगभग 50 मिनट तक चली। इस दौरान विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रमुख नेता उपस्थित थे, जिनमें वीरेंद्र दुबे, केदार जैन, संजय शर्मा, विकास राजपूत, अनिल शुक्ला, कमल वर्मा, मनीष मिश्रा और ओंकार सिंह ठाकुर शामिल थे।
कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने सौंपा ज्ञापन
मंगलवार को कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मुख्य सचिव और शिक्षा सचिव को ज्ञापन सौंपा, जिसमें युक्तियुक्तकरण के विरोध में 16 सितंबर को धरना और रैली के आयोजन की जानकारी दी गई थी। इसके तुरंत बाद सरकार ने शिक्षक संगठनों को चर्चा के लिए बुलाया और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा।
युक्तियुक्तकरण के फैसले का विरोध कर रहे शिक्षक संगठन
शिक्षक संगठन युक्तियुक्तकरण के फैसले का विरोध कर रहे हैं, जिसमें प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं को एक साथ मर्ज किया जाना है। उनकी मांग है कि 2008 के सेटअप के अनुसार शिक्षकों की संख्या को बिना किसी बदलाव के बनाए रखा जाए, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में कोई कमी न हो। उन्हें डर है कि शिक्षकों की संख्या में कटौती से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
अगर सरकार शिक्षक संगठनों की मांगों को पूरा नहीं करती है, तो शिक्षक संगठन 16 सितंबर को आयोजित धरना और रैली के बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन की शुरुआत कर सकते हैं। शिक्षक संगठनों ने सरकार को ज्ञापन सौंपा, जिसके तुरंत बाद सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बैठक का समय तय किया और शिक्षक संगठनों को चर्चा के लिए बुलाया।
शिक्षकों की संख्या में कोई कटौती न की जाए: दुबे
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रदेश संचालक वीरेंद्र दुबे ने बताया कि युक्तियुक्तकरण के खिलाफ प्रदेश के विभिन्न जिलों के कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, शिक्षा सचिव व संचालक महोदय को ज्ञापन सौंपा गया है
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो 9 सितंबर को प्रदेश के सभी स्कूलों में तालाबंदी की जाएगी। इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा का भी समर्थन मिला है। शिक्षक संगठनों की मांग है कि युक्तियुक्तकरण के फैसले को वापस लिया जाए और शिक्षकों की संख्या में कोई कटौती न की जाए।
क्या होता है युक्तियुक्तकरण?
युक्तियुक्तकरण एक शैक्षिक प्रबंधन प्रक्रिया है जिसमें विद्यालयों के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव किया जाता है, ताकि शैक्षिक प्रक्रिया को अधिक कुशल और प्रभावी बनाया जा सके। इसके तहत विद्यालयों के आकार, संरचना और प्रबंधन में बदलाव किया जा सकता है, जैसे कि छोटे विद्यालयों को बड़े विद्यालयों में मर्ज करना या विद्यालयों के बीच संसाधनों का समायोजन करना।
यह प्रक्रिया अक्सर शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार, संसाधनों का बेहतर उपयोग, और शिक्षकों की क्षमता निर्माण पर केंद्रित होती है। हालांकि, युक्तियुक्तकरण के फैसले अक्सर विवादित होते हैं, क्योंकि वे शिक्षकों की नौकरियों, विद्यार्थियों की पढ़ाई, और स्थानीय समुदायों पर प्रभाव डाल सकते हैं।
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छत्तीसगढ़ के शिक्षक संगठन युक्तियुक्तकरण के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह फैसला शिक्षकों की संख्या में कटौती करेगा और शैक्षिक गुणवत्ता को प्रभावित करेगा।
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