13 वर्षीय सुमाना : कुंडू के अंग दान से दो को मिला नया जीवन
Mon, Jun 8, 2026
00 एम्स रायपुर ने दर्ज किया अपना पहला बाल चिकित्सा मृत अंग दान
रायपुर।
साहस और मानवता की एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए, रायपुर की 13 वर्षीय सुमाना कुंडू के परिवार ने गंभीर न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका संबंधी) जटिलताओं के बाद उन्हें ब्रेन डेड (मस्तिष्क मृत) घोषित किए जाने पर अंगदान की सहमति दी। उनके इस निस्वार्थ निर्णय ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में दो जीवन रक्षक किडनी ट्रांसप्लांट (गुर्दा प्रत्यारोपण) को सफल बनाया, जिससे एंड-स्टेज किडनी रोग से पीडि़त मरीजों को नया जीवन और नई उम्मीद मिली है।
यह बच्ची पिकनोडाईसोस्टोसिस से पीडि़त थी, जो एक बेहद दुर्लभ अनुवांशिक विकार (जेनेटिक डिसऑर्डर) है। इस बीमारी में हड्डियां असामान्य रूप से घनी लेकिन बेहद कमजोर हो जाती हैं। बचपन से ही वह गंभीर इंट्राक्रैनियल हाइपरटेंशन (मस्तिष्क के भीतर अत्यधिक दबाव) से जूझ रही थी, जिसके लिए उनके मस्तिष्क में वेंट्रिकुलोपेरिटोनियल (वीपी) शंट डाला गया था। बीते वर्षों में, शंट के बार-बार खराब होने के कारण उनकी कई सर्जिकल रीविज़न (दुरुस्तीकरण) की गईं, और अंतत: सेकेंडरी ऑप्टिक एट्रोफी के कारण उनकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। वह एम्स रायपुर में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी टीमों के सहयोग से बाल रोग विभाग (पीडियाट्रिक्स) की विशेष देखरेख में थीं। 29 मई को गंभीर न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं के कारण उन्हें पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पिकू) में भर्ती कराया गया था। बहुविषयक (मल्टीडिसीप्लिनरी) मेडिकल टीम के गहन उपचार और निरंतर प्रयासों के बावजूद, उनकी स्थिति बिगड़ती गई और अंतत: उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
इस कठिन घड़ी में, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर अंबे पटेल और विनीता पटेल ने शोक संतप्त परिवार को मृत अंगदान के बारे में परामर्श दिया। अद्भुत करुणा और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए, परिवार ने दोनों किडनियां दान करने की सहमति दे दी। इसके बाद, स्थापित प्रतीक्षा सूची नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (सोटो-छत्तीसगढ़) के माध्यम से अंगों का आवंटन किया गया। दान की गई एक किडनी रायपुर टाटीबंध निवासी एक 15 वर्षीय लड़के को प्रत्यारोपित की गई, जो पिछले तीन वर्षों से डायलिसिस पर निर्भर था, जबकि दूसरी किडनी मध्य प्रदेश के बालाघाट के एक 45 वर्षीय मरीज को दी गई, जो पिछले पांच वर्षों से डायलिसिस करा रहे थे। दोनों ट्रांसप्लांट प्रक्रियाएं पूरी तरह सफल रहीं और दोनों प्राप्तकर्ता किडनी ट्रांसप्लांट आईसीयू में तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। इस जटिल सर्जिकल ट्रांसप्लांट को यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अमित आर. शर्मा, डॉ. दीपक बिस्वाल और डॉ. राघवेंद्र ने नेफ्रोलॉजी टीम (जिसमें डॉ. विनय राठौर और डॉ. नीलम मरावी शामिल थे) और एनेस्थिसियोलॉजी टीम (जिसका नेतृत्व प्रो. मोनिका खेत्रपाल और डॉ. सरिता रामचंद्रानी कर रही थीं) के साथ मिलकर अंजाम दिया। यह ऐतिहासिक चिकित्सा उपलब्धि बाल रोग, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, एनेस्थिसियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, फॉरेंसिक मेडिसिन विभागों और सोटो-छत्तीसगढ़ के आपसी और सुचारू समन्वय के प्रयासों से ही संभव हो सकी।
इस बड़ी चिकित्सा उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए डॉ. विनय राठौर ने कहा कि यह एम्स रायपुर में आठवां मृत अंगदाता अंगदान था और संस्थान का पहला बाल चिकित्सा (पीडियाट्रिक) मृत अंगदान था। उन्होंने आगे बताया कि एम्स रायपुर अब तक कुल 99 किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है, जिसमें मृत दाताओं से प्राप्त 14 किडनियां शामिल हैं, और यह प्रक्रिया संस्थान का तीसरा पीडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट है।
एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक, लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने कुंडू परिवार के इस निर्णय की सराहना की और इसे करुणा व सामाजिक जिम्मेदारी का एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंगदान एक ऐसा शक्तिशाली माध्यम है जो कई जिंदगियां बचा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने जटिल ट्रांसप्लांट प्रक्रियाओं के प्रबंधन में एम्स रायपुर की बढ़ती विशेषज्ञता की भी पुष्टि की।
इस अवसर पर स्ह्रञ्जञ्जह्र छत्तीसगढ़ के संयुक्त संचालक डॉ. वरुण अग्रवाल ने कहा कि अंगदान केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। एक परिवार का निर्णय कई परिवारों के जीवन में नई उम्मीद लेकर आता है। वहीं मीडिया कंसल्टेंट गीतिका ब्रह्मभट्ट त्रिपाठी ने कहा कि सुमना का अंगदान समाज में अंगदान जागरूकता का एक प्रेरक उदाहरण है, जो लोगों को मृत्यु के बाद भी जीवन बांटने की प्रेरणा देगा।
यह अंगदान न केवल दो मरीजों के लिए जीवनदान साबित हुआ, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश भी देता है कि मृत्यु के बाद भी किसी का जीवन अनेक लोगों के जीवन में आशा का प्रकाश बन सकता है।
मानवता के प्रति परिवार के इस असाधारण और अभूतपूर्व योगदान के सम्मान में मृत किशोरी को संस्थान द्वारा औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर (सलामी) दिया गया। उनकी यह अनमोल विरासत उन लोगों के जीवन के माध्यम से हमेशा जीवित रहेगी जिन्हें उन्होंने एक नया जीवन दिया है।
मुख्य सचिव ने विभागीय : योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की
Mon, Jun 8, 2026
रायपुर।
मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के सभी विभागों के सचिवों की बैठक ली। बैठक में विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को शासन के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्यों को वरीयता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की लगातार मानिटरिंग करने के निर्देश दिए है।
बैठक में ई-ऑफिस, ई अटेंडेंस, लोक सेवा गारंटी, नियद नेल्लानार डेसबोर्ड, पीएम प्रगति पोर्टल, ई-प्रगति सीजी स्टेट पोर्टल, टीबी मुक्त भारत, सेवा सेतु, पीएम सूर्य घर बिजली सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को विभागों के अंतर्गत रिक्त पदों की अद्यतन जानकारी रखने एवं कर्मचारी चयन मंडल के कार्यों की प्रगति की जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों से ली।
बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विधायी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमख सचिव श्रीमती शहला निगार, मुख्यमंत्री एवं खनिज विभाग के सचिव श्री पी.दयानंद, वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, सामान्य प्रशासन एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस.प्रकाश, सामान्य प्रशासन, जनशिकायत निवारण एवं उच्च शिक्षा विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उभोक्ता संरक्षण एवं वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग की सचिव सुश्री रीना बाबा साहेब कंगाले, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव सुश्री आर. शंगीता, गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चम्पावत, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव बसवराजु एस., जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सुश्री ईफ्फत आरा सहित राज्य शासन के अन्य विभागों के सचिव मौजूद थे।
मर्दापाल अंचल : को 4.06 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
Mon, Jun 8, 2026
00 वनमंत्री केदार कश्यप ने किया भूमिपूजन और लोकार्पण
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को गति देने के लिए मर्दापाल अंचल की 23 ग्राम पंचायतों में 4 करोड़ 6 लाख 67 हजार रूपए की लागत से विभिन्न विकास कार्यों का शुभारंभ किया गया है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों का दौरा कर इन बुनियादी विकास कार्यों का विधि-विधान से भूमिपूजन किया।
इन स्वीकृत विकास कार्यों में मुख्य रूप से सड़क, पुलिया, स्कूल भवन, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, रंगमंच और अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से स्थानीय ग्रामीणों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र के समग्र विकास को एक नई गति प्राप्त होगी। ग्राम चांगे लगभग 77.96 लाख रूपए की लागत से पुलिया, नवीन प्राथमिक शाला भवन, सीसी सड़क, रंगमंच और सामुदायिक भवन निर्माण। ग्राम मूलनार में लगभग 90.79 लाख रूपए की लागत से पुलिया, बाउंड्रीवाल, सीसी सड़क तथा अन्य बुनियादी ढांचागत विकास, ग्राम बड़ेकुरुषनार लगभग 88.14 लाख रूपए की लागत से पुलिया, रंगमंच, आहाता, अटल डिजिटल सुविधा केंद्र, नवीन प्राथमिक शाला भवन, सांस्कृतिक भवन और पंचायत भवन का निर्माण, ग्राम बेचा लगभग 21.79 लाख की लागत से रंगमंच एवं माध्यमिक शाला भवन का भूमिपूजन और लोकार्पण, अन्य ग्राम पंचायतें रानापाल, कोंगेरा, मुंगवाल और चेरंग में 28 लाख रूपए तथा हथकली, मटवाल, पेरमापाल, नरिहा और आदनार में लगभग 1 करोड़ रूपए की लागत से सामुदायिक भवन, सीसी सड़क, शाला भवन और पुलिया निर्माण कार्य का भूमिपूजन और लोकार्पण किया गया, शामिल है।
इस अवसर पर वनमंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार सुदूर गांवों तक विकास की मुख्यधारा पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सड़क, शिक्षा, सामुदायिक अधोसंरचना और डिजिटल सेवाओं का विस्तार हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। श्अटल डिजिटल सुविधा केंद्रोंश् के माध्यम से अब ग्रामीणों को सभी जरूरी शासकीय सेवाओं का लाभ उनके अपने गांव में ही मिल सकेगा। उन्होंने आगे जोड़ा कि सरकार का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि सुशासन के माध्यम से ग्रामीणों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाकर हर गांव को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है।